इसरो का एक और कमाल भारत का बजेगा स्पेस में डंका।

chandrayaan 3

चंद्रयान-3, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के तीसरे मून मिशन के रूप में अपना सफर प्रारंभ कर दिया है। इस मिशन के लॉन्च के साथ ही भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।

शुक्रवार को, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 642 टन वजनी और 43.5 मीटर ऊंचे रॉकेट LVM3-M4 ने चंद्रयान-3 को लॉन्च किया। यह शक्तिशाली रॉकेट चंद्रयान-3 को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने के लिए अपनी ऊंचाई का पूरा उपयोग करेगा। इसके बाद, चंद्रयान-3 लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी में प्रवेश करेगा, जो उसे चंद्रमा तक पहुंचने के लिए अपेक्षाकृत यात्रा कराएगी। यह दुनिया के सबसे ऊँचे ऊड़ानभरे चरणों में से एक है और चंद्रयान-3 को विज्ञान, अनुसंधान और अन्वेषण क्षेत्र में नए उच्चाधिकारियों द्वारा नए मार्ग प्रदान करेगी।

चंद्रयान-3 मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिक अन्वेषण करना है। इसके लिए, इसके साथ एक उच्च संकर व्यायामी प्रक्षेपण यन्त्र (एलएसआरईयूए) और अन्य वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयोगात्मक उपकरण शामिल हैं। यह मिशन चंद्रमा के तत्वों, संरचना, उपग्रह और उसके प्राकृतिक पर्यावरण को गहराई से अध्ययन करने का उद्देश्य रखता है। चंद्रयान-3 में विज्ञान क्षेत्र में उत्कृष्टता और प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए एक सामरिक तथ्य का परिचय देने का प्रयास किया जाएगा।

चंद्रयान-3 के परिवहन माध्यम की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं उसकी एलएसआरईयूए इंजन क्षमता, जो बड़े और भारी प्रकाश प्रक्षेपण यंत्रों को प्रोपेलेंट के अलावा और किसी अन्य प्रोपेलेंट की आवश्यकता के बिना उड़ा सकती है। यह एक विज्ञानिक महायान्त्रिकी उपलब्धि है जो भारत की अंतरिक्ष उद्यान विज्ञान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। चंद्रयान-3 अपनी उच्च प्रदर्शन के लिए प्रशंसापात्र रहेगा और अंतरिक्ष अनुसंधान के दृष्टिकोण से दुनिया भर में भारत को मान्यता प्राप्त करेगा।

मिशन चंद्रयान-2 मिशन के बाद भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान में एक और बड़ी उपलब्धि है, जो देश की अग्रणी भूमिका को दर्शाती है। चंद्रयान-3 ने सभी भारतीयों के मन में गर्व की भावना जगाई है और देश को वैज्ञानिक और तकनीकी उन्नति में नए मार्ग प्रदान करेगा। यह मिशन न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को भी मजबूत करेगा और वैज्ञानिक समुदाय में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को पुनर्स्थापित करेगा। चंद्रयान-3 के सफलतापूर्वक पूरा होने पर, देश अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी पहचान को और भी मजबूत करेगा और आगे बढ़ने के लिए नए दरवाजे खोलेगा।

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